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सुनील और नीरज टूटने नहीं देंगे माता-पिता का सपना 

लखनऊ।  कोरोना काल में खेलों की दुनिया पर काफी असर पड़ा है लेकिन ऐसा नहीं है कि सिर्फ खेल ही रुके पड़े है. इनमे कई तो ऐसे प्लेयर्स है जिनके माता-पिता कड़ी मेहनत करके ये सपना संजोये थे कि उनके बच्चे आने वाले समय में चमक बिखेरकर उनका नाम रोशन करेंगे लेकिन कोरोना वायरस के चलते लगे लॉकडाउन के चलते उनके सपने टूट गए.

वही  कई प्लेयर्स की जीविका या प्रैक्टिस का खर्चा ही टूर्नामेंट में मिली इनामी राशि से होता था लेकिन हालत ऐसे बन गए कि अब जिंदगी को चलाने के लिए दूसरे साधनों का सहारा के रहे है. ऐसे ही दो खिलाड़ी है  उत्तर प्रदेश के मुक्केबाज सुनील चौहान और उनके भाई तीरंदाज नीरज चौहान जिनका खेल से तब नाता टूटने के हालात बन गए जब उनके पिता अक्षय चौहान का काम धंधा बंद हो गया.

कोरोना काल में छूटा पिता का काम तो खेल मंत्री ने दी आर्थिक मदद

मुक्केबाज सुनील चौहान

दरअसल अक्षय पिछले कई साल से मेरठ के स्पोर्ट्स स्टेडियम के हॉस्टल में संविदा पर प्लेयर्स के लिए खाना बनामें का काम करते थे लेकिन लॉकडॉउन में हॉस्टल बंद होने से उनका ये काम भी बंद हो गया. ये देख उनके बेटे  जीविका चलाने के लिए खेल छोड़ कर सब्जी बेचने का काम करने लगे क्योंकि उनके परिवार के सामने  संकट हो गया था और  पिता परिवार के एकमात्र कमाने वाले हैं.

खाना बनाते हुए पिता ने ठानी-बच्चों को बड़ा खिलाड़ी है बनाना

तीरंदाज नीरज चौहान

इस हालात की जानकारी खेल खेल मंत्रालय को होने पर वो यूपी के इन उभरते हुए खिलाड़ियों की मदद के लिए आगे आया.  ऐसा इसलिए हुआ कि केंद्रीय खेल मंत्री किरेन रिजीजू ने खिलाडिय़ों के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय कल्याण कोष के तहत प्रत्येक एथलीट को 5 लाख रुपये की पूर्व-अनुदान वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है.

इन उभरते हुए खिलाड़ियों में से नीरज चौहान ने सीनियर तीरंदाजी चैंपियनशिप-2018 में 50 मीटर तीरंदाजी  रजत पदक के साथ  65 वें राष्ट्रीय स्कूल खेल-2020 में पदक जीता है जबकि उनके भाई सुनील चौहान मुक्केबाज़ी में खेलो इंडिया विश्वविद्यालय खेल-2020 में स्वर्ण पदक विजेता  है.

बॉक्सिंग कोच अभिषेक व तीरंदाजी कोच अनुपमा ने खेल को ओर मोड़ा

मुक्केबाज सुनील ने इस सहायता पर ख़ुशी जताते हुए ख़ुशी जताई कि इससे मेरे  परिवार की काफी मदद हो जाएगी. इन दोनों को ये समाचार मिलने पर कि मुक्केबाज सुनील चौहान और तीरंदाज नीरज चौहान को केन्द्रीय खेलमंत्री की पहल से  5-5 लाख की सहायता मिलेगी तो दोनों खुशी से झूम उठे.

वैसे हीं खेल मंत्री ने इंस्ट्रग्राम पर अपने पोस्ट में सुनील चौहान और नीरज की तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा कि मुझे उत्तर प्रदेश के दोनों खिलाडिय़ों की मदद का एलान और घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है. इसके साथ में उन्होंने ये भी लिखा कि कोरोना के दौर में  आर्थिक संकट से जूझ रहे खिलाड़ी  खेल मंत्रालय की वेबसाइट पर मदद के लिए आवेदन कर सकते है.

इसमें  सुनील को  मेरठ स्टेडियम में साल 2010 में डिप्टी स्पोर्ट्स अफसर अभिषेक कुमार धानुक ने मुक्केबाजी के टिप्स दिए. इस समय सुनील कोच भूपेन्द्र सिंह यादव से ट्रेनिंग ले रहे हैं. बाक्सिंग कोच अभिषेक धानुक के अनुसार  उनकी पत्नी ने सुनील और अभिषेक को बचपन में ही घर से लाकर खेल से जोड़ने में बड़ी भूमिका अदा की जबकि उनके पिता इसके लिए कड़ी मेहनत की कि ये बच्चे खेल के मैदान से जुड़े रहे.

ये भी जानकर लोगो को हैरानी होगी कि बाक्सिंग कोच अभिषेक धानुक की पत्नी ने सुनील के भाई  नीरज चौहान को तीरंदाजी की ओर मोड़ा.
मुक्केबाज सुनील चौहान के अनुसार मुक्केबाजी कोच अभिषेक धानुक ने मोहल्ले और गली से कंचा और गुल्ली-डण्डा छुड़वाकर मुझे अलग पहचान दी. उन्होंने मेरी हर अवसर पर मदद की. वहीं वर्तमान  कोच भूपेन्द्र यादव भी मेरा हौसला बढ़ा रहे है.

वही नीरज चौहान के अनुसार बचपन में गलियों में घूमता था. फिर  कोच अनुपमा धानुक ने मुझे स्टेडियम लाकर तीरंदाजी से जोड़ा.  अब मुझे तीरंदाजी का जुनून है. गरीबी की परवाह न करते हुए खेल पर पूरा फोकस है.  पिता हम तीन भाइयों को खेल की दुनियां में बुलंदी पर देखना चाहते हैं और मै इस सपने को पूरा करूँगा.

अक्षय चौहान और उनकी पत्नी प्रेमशीला ने बेहद गरीबी के बीच मेहनत मजदूरी कर अपने बच्चो को इंटरनेशनल प्लेयर्स बनाने का सपना देखा था लेकिन सुमित किन्हीं कारण से खेल से दूर हो गए थे.

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