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आईपीएल के प्रायोजन की होड़ में पतंजलि पिछड़ी, ये इंडियन कंपनी सबसे आगे 

कोरोना काल में इस साल इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का आयोजन 19 सितम्बर से यूएई में हो रहा है. हालांकि इससे पहले बीसीसीआई के सामने तब चुनौती खड़ी हो गयी जब  भारत-चीन के बीच चल रहे विवाद के चलते चीनी मोबाइल कम्पनी वीवो का मुख्य प्रायोजन कांट्रेक्ट एक साल के लिए निलंबित कर दिया गया.

इससे बीसीसीआई के सामने जल्दी ही नया प्रायोजक तलाशने की चुनौती खड़ी हो गयी. इस बीच कुछ भारतीय सहित कई बड़ी कंपनीज ने प्रायोजन के लिए आवेदन किया था. इसके लिए बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि में भी रूचि दिखाई थी. हालांकि सूत्रों के अनुसार पहली बार क्रिकेट  प्रायोजन के फील्ड में उतर रही  टाटा एंड संस होड़ में सबसे आगे दिख रही है.

इसके साथ प्रायोजन की होड़ में अब चार से पांच कंपनीज दिख रही है. हालांकि प्रायोजन का अधिकार किसको मिलता है. इस बारे में फैसला 18 अगस्त को होगा  और इसी दिन बीसीसीआई आधिकारिक प्रायोजक के नाम की घोषणा करेगी. इस बारे में बीसीसीआई के उच्च स्तरीय सूत्रों के अनुसार, टाटा एंड संस ने प्रायोजन अधिकार हासिल करने के लिए बोली लगाई है.

ये बहुत ही मजबूत देशी ब्रांड होने के कारण बाकी चार प्रतिद्वंद्वियों से यह कंपनी काफी आगे है. बीसीसीआई की प्राथमिकता इस बार यही है कि आईपीएल के प्रायोजन अधिकार इस बार किसी भारतीय कंपनी को मिलें. फिर भले ही उसे कीमत से थोड़ा-बहुत समझौता करना पड़े. बहरहाल, इस बारे में कोई भी आधिकारिक घोषणा बीसीसीआी द्वारा 18 अगस्त को की जाएगी.

जानकारी के अनुसार प्रायोजन के लिए पांच कंपनियां बोली लगाने की तैयारी में है जिसमे चार भारत की हैं. भारत की कंपनीज टाटा संस, एजुकेशन से जुड़ी अनअकादमी, जियो और पतंजलि हैं. वही  बाइजूस भी होड़ में है लेकिन उसमें चीन का निवेश (चीन की कंपनी के साथ साझेदारी)   है जो उसकी संभावना पहले ही खत्म कर रहा है.

वैसे वीवो हर साल बीसीसीआई को प्रायोजन के लिए 440 करोड़ रुपये का भुगतान करता था लेकिन इन हालत में ये उम्मीद कम है कि बोर्ड को इतनी रकम मिल पायेगी. वैसे पिछले सप्ताह में बीसीसीआई ने उम्मीद जताई थी कि उसे 300 करोड़ मिल जायेंगे लेकिन ये आसार लग रहे है कि बोर्ड को इससे ज्यादा ही मिल जायेगा.

सूत्रों की माने तो जियो को खुद को प्रमोट करने के लिए आईपीएल की जरूरत नहीं है, तो पतंजलि द्वारा लगायी गई बोली की रकम टाटा एंड संस के मुकाबले काफी कम है और जियो व पतांजलि ज्यादा रकम खर्च करने के लिए तैयार नहीं है.

वैसे टाटा संस अगर प्रायोजक बनती है तो वो क्रिकेट से पहली बार जुड़ेगी. देश की अग्रणी ब्रांड टाटा ग्रुप की इंडियन सुपर लीग में टीम है और इसकी फूटबाल अकादमी भी है. वही कंपनी द्वारा कुश्ती और प्रो कबड्डी लीग को भी प्रायोजित किया जाता है.

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