खेलों की दुनिया में डोपिंग का डंक काफी नीचे तक फैल गया है और अब तो इसकी चपेट में कई जूनियर खिलाड़ी भी आ रहे है। हालिया घटनाक्रम में भारतीय जूनियर जूडो खिलाड़ी दीपांशु बालयान के खिलाफ प्रतिबंधित पदार्थ फ्यूरोसेमाइड (डॉयूरेटिक दवा) के सेवन के चलते राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) के डोपिंग रोधी अनुशासन पैनल (एडीडीपी) ने 22 माह के लिए निलंबित कर दिया है।
एक साल दस महीने की दीपांशु की निलंबन अवधि 17 अक्टूबर 2019 से शुरू होगी जो इसी तारीख को अस्थाई रूप से निलंबित हुए थे। हालांकि उनके पास इस फैसले के खिलाफ 21 दिन के अंदर नाडा के डोपिंग रोधी अपील पैनल (एडीएपी) में अपील करने का अवसर है।
दीपांशु का नमूना पिछले साल जूनियर एशियाई जूडो चैंपियनशिप की राष्ट्रीय टीम के चयन के लिए गत जून में भोपाल में हुए ट्रायल के समय लिया गया था जिसका परिणाम प्रतिबंधित पदार्थ के लिए पॉजिटिव मिला है। हालांकि उन्होंने 90 किग्रा वर्ग के ट्रायल में जीत दर्ज की थी।
वैसे फ्यूरोसेमाइड के सेवन से पेशाब की मात्रा बढ़ने के साथ वजन भी घट जाता है। नाडा के अनुसार जूडो में खिलाड़ी को वजन के अनुसार वर्ग में जगह मिलती हैै। ऐसे में हो सकता है कि इस दवा को लेने से खिलाड़ी को अपने वजन से कम वर्ग में खेलने या किसी अन्य भार वर्ग में हिस्सा लेने का मौका मिल गया हो।
इस बारे में अध्यक्ष आहना मेहरोत्रा, जगबीर सिंह और डॉ.पीएसएम चंद्रन के एडीडीपी पैनल के अनुसार इस खिलाड़ी को अपने डॉक्टर को बतानाचाहिए था कि वो वखिलाड़ी है और इसी के अनुसार उसे दवा दी जाएं।
हालांकि नाडा ये सिद्ध नहीं कर सका कि बालयान ने जानबूझकर दवा ली जिसके चलते पैनल ने डोपिंग के लिए नियम 10.2.1 के अनुसार चार साल की कड़ी सजा की सिफारिश ठुकरा दी थी। वैसे दवा अगर अंजाने में ली गई हो तो अयोग्यता का समय दो साल होता है लेकिन खिलाड़ी को नाडा का नोटिस समय पर न मिलने के चलते सजा में दो महीने कम कर दिए गए।